कारवॉं

नयी मंज़िल के मीरे-कारवाँ भी और होते हैं
पुराने ख़िज़्रे-रह बदले वो तर्ज़े-रहबरी बदला
-फ़िराक़ गोरखपुरी

बुधवार, 11 जनवरी 2017

रवि वार्ता Ravi Varta 2‌ विपिन चौधरीVipin Chaudhary

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